विद्यालय प्रबंधन समितियां (SMC) के लिए दिशा-निर्देश 2026
विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, पारदर्शिता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति (School Management Committee - SMC) की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय प्रबंधन समितियों के लिए दिशा-निर्देशों में विद्यालय को समुदाय के सहयोग से संचालित एक सजीव शैक्षिक केंद्र बनाने पर जोर दिया गया है।
विद्यालय प्रबंधन समिति की संरचना
दिशा-निर्देशों के अनुसार, समिति में 75 प्रतिशत प्रतिनिधित्व माता-पिता या अभिभावकों का तथा 25 प्रतिशत अन्य निर्धारित प्रतिनिधियों का होता है। समिति में न्यूनतम 50 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। वंचित वर्गों तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) के आनुपातिक प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान दिया जाता है।
निर्वाचन एवं कार्यकाल
समिति के गठन के लिए प्रधानाध्यापक द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्वाचन कार्यक्रम जारी किया जाता है। मतदान के समय न्यूनतम 50 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। विवाद की स्थिति में गुप्त मतदान का प्रावधान दर्शाया गया है। समिति का कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित किया गया है। गठन के बाद निर्धारित अवधि में पहली बैठक आयोजित कर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया जाता है।
समुदाय की सक्रिय भागीदारी
विद्यालय प्रबंधन समिति विद्यालय के विकास, जवाबदेही, पारदर्शिता और शैक्षिक वातावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय के बीच समन्वय से बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण-अधिगम वातावरण तैयार किया जा सकता है।
विद्यालय प्रबंधन समिति की संरचना, गठन और कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी के लिए नीचे दिए गए PDF दस्तावेज देखें।
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