बाल संसद: गठन, संचालन एवं प्रभावी क्रियान्वयन
विद्यालयों में बच्चों को नेतृत्व, निर्णय लेने की क्षमता, जीवन कौशल तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से बाल संसद की अवधारणा प्रस्तुत की गई है। यह केवल संसद की नकल नहीं, बल्कि बच्चों द्वारा वास्तविक लोकतांत्रिक मूल्यों के अभ्यास का अवसर है।
बाल संसद के गठन के लिए सात चरण निर्धारित किए गए हैं। इसमें सभा आयोजन, वर्गवार बैठक, उन्मुखीकरण, नेतृत्व चुनाव, समूह निर्माण, नामकरण तथा मंत्रियों का चयन शामिल है। मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री एवं उप-प्रधानमंत्री के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, जल एवं कृषि, पुस्तकालय एवं विज्ञान तथा सांस्कृतिक एवं खेल जैसे विभागों की जिम्मेदारी दी जाती है। इसमें 50 प्रतिशत अनिवार्य बालिका भागीदारी का प्रावधान बताया गया है।
बाल संसद के माध्यम से बच्चों को विद्यालय की गतिविधियों और प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलता है। शिक्षा मंत्री नामांकन एवं उपस्थिति, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता मंत्री व्यक्तिगत एवं विद्यालय परिसर की स्वच्छता, जल एवं कृषि मंत्री पौधारोपण एवं जल स्रोतों की सफाई तथा पुस्तकालय एवं विज्ञान मंत्री पठन-पाठन सामग्री एवं प्रायोगिक शिक्षा से जुड़े कार्यों पर ध्यान देंगे। सांस्कृतिक एवं खेल मंत्री चेतना सत्र, खेल सामग्री और रचनात्मक गतिविधियों में सहयोग करेंगे।
ब्लूप्रिंट में दैनिक, पाक्षिक/मासिक तथा त्रैमासिक गतिविधियों के माध्यम से बाल संसद के निरंतर संचालन पर जोर दिया गया है। शिक्षक संयोजक मार्गदर्शन करेंगे, जबकि CRCC जैसे सपोर्ट सिस्टम समय-समय पर कार्यों की समीक्षा और आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। SMC के साथ समन्वय तथा उपलब्ध विद्यालय संसाधनों का छोटे-छोटे क्रियाकलापों के लिए उपयोग भी महत्वपूर्ण बताया गया है।
