गद्यगुंजन |अगस्त-दिसंबर । अर्धवर्षिक पत्रिका । 2025

‘गद्यगुंजन’ का यह नवीन सत्र हिंदी गद्य की बहुआयामी अभिव्यक्तियों को समर्पित है। इस सत्र में पत्रिका ने रचनाओं को विधागत खंडों में सुव्यवस्थित कर पाठकों के लिए एक सुसंगठित, सहज और समृद्ध पाठ अनुभव प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। आत्मानुभूति, नैतिक मूल्यों, शिक्षा, जीवन-स्मृतियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएँ इस सत्र की विशेष पहचान हैं।

शिक्षकों एवं साहित्यकारों द्वारा रचित ये गद्य रचनाएँ न केवल उनके रचनात्मक चिंतन और संवेदनशील दृष्टि को उजागर करती हैं, बल्कि समकालीन समाज और शिक्षा-जगत से जुड़े प्रश्नों पर भी सार्थक संवाद स्थापित करती हैं। इस सत्र में ‘लेखक अपने शब्दों में’, ‘मूल्यों की पाठशाला’, ‘शैक्षणिक’, ‘स्वानुभव’, ‘दिवस विशेष’ और ‘पथ की स्मृतियाँ’ जैसे खंडों के माध्यम से गद्य साहित्य की विविध रंगछटाओं को सहेजा गया है।

अर्धवार्षिक प्रकाशन की नई व्यवस्था के साथ यह सत्र ‘गद्यगुंजन’ को और अधिक परिपक्व, गुणवत्तापूर्ण तथा पाठक-उपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


Shivendra Prakash Suman

Technical Team Leader, ToB

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