Anupa Kumari ( अनुपा कुमारी )
ID: cfba6b4c2ec1

मेरे गाँव की आजादी की कहानी

  • Gender: 👩 Female
  • Class / Role: 🎓 Class 5
  • School: 🏫 P. S. MATULI (प्राथमिक विद्यालय मातुलि )
  • District & Block: 📍 ROHTAS, BIKRAMGANJ
  • Applied Category: 📝 Teacher
Selected Under: Judge's Choice Marks: 9/10 Download Certificate
Competition Photos
मेरे गाँव की आजादी की कहानी

बृज बिहारी दुबे 


राष्ट्रभक्ति, त्याग और संघर्ष की अमर गाथा।

स्थानीय इतिहास को जानने और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को समझने के उद्देश्य से मैंने रोहतास जिले में स्थित बृज बिहारी दुबे जी के गाँव का भ्रमण किया। इस दौरान उनके परिवार के सदस्यों एवं स्थानीय लोगों से मिलने और बातचीत करने का अवसर मिला। उनसे प्राप्त जानकारी तथा उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर यह जीवनी तैयार की गई है।

स्वतंत्रता सेनानी बृज बिहारी दुबे का जन्म 28 मई 1925 को दुर्गापुर (डेहरी), जिला रोहतास, बिहार में हुआ। उनके पिता का नाम गणेश दुबे था। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गाँव में प्राप्त की और आगे की पढ़ाई तिलौथू हाई स्कूल से की। छात्र जीवन से ही उनमें देशभक्ति की भावना प्रबल थी और वे छात्र कांग्रेस की गतिविधियों से जुड़ गए।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान:- सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बृज बिहारी दुबे ने तिलौथू क्षेत्र में छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व में छात्रों ने विद्यालय का बहिष्कार किया और अंग्रेजी शासन के विरोध में आंदोलन चलाया। वे लगभग ढाई महीने तक भूमिगत रहकर रोहतास के आसपास के क्षेत्रों में राष्ट्रीय चेतना फैलाते रहे। बाद में 28 अक्टूबर 1942 को उन्हें गिरफ्तार किया गया, पहले 3 साल तक सासाराम जेल और बाद में पटना जेल कैंप भेजे गए जहाँ उन्होंने कठिन कारावास की सजा भोगी। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने काशी विद्यापीठ में दाखिला लेकर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की।

स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगाँठ के अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा उन्हें ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया, जो उनके देश के प्रति त्याग और समर्पण का प्रतीक है।

भ्रमण के दौरान उनके परिवार और गाँव के लोगों से बातचीत कर उनके जीवन, संघर्ष और राष्ट्रसेवा से अनेक जानकारियां प्राप्त हुईं। इस दौरान मैंने बृज बिहारी दुबे जी के पुत्र द्वारा निर्मित वर्तमान घर का अवलोकन किया।


 उनके पुत्र द्वारा निर्मित वर्तमान घर

इस घर को देखकर और परिवार तथा पड़ोसी से बातचीत करके यह अनुभव होता है कि स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत केवल इतिहास की पुस्तकों में ही नहीं बल्कि उनके परिवारों तथा गाँव के लोगों में भी जीवित है। उनका यह वर्तमान घर हमें उन संघर्षपूर्ण दिनों की याद दिलाता है और राष्ट्र के लिए किए गए उनके योगदान को सजीव रूप में सामने लाता है। अब स्वतंत्रता सेनानी बृज बिहारी दुबे का जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्र के प्रति राष्ट्रप्रेम, साहस, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उनका संघर्ष और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन हमारे लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है।

वन्दे मातरम्!

जय हिन्द!

Remarks
Very Nice
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