Dr.Deepak Kumar Ojha (डॉक्टर दीपक कुमार ओझा )
ID: a37ea017b6eaमेरे गाँव की आजादी की कहानी
- Gender: 👨 Male
- Class / Role: 👩🏫 Teacher
- School: 🏫 Utkramit Middle School Bhagrasna Dhamar (उत्क्रमित मध्य विद्यालय भगरसना धमार )
- District & Block: 📍 BHOJPUR, ARA
- Applied Category: 📝 Teacher
Haripal Dubey
हरिपाल दूबे कवि कैलाश के सहयोगियों मे हरिपाल दूबे को एक तेज तर्रार स्वतंत्रता सेनानी के रुप में याद किया जाता है। इनका जन्म भोजपुर जिला के आरा सदर प्रखण्डान्तर्गत सलेम पुर गाँव में हुआ था। इनका जन्म सन् 1922 ई० मे श्रवण मास के प्रदोष तिथि को हुआ था। इनके पिता का नाम राम प्रपन्न दूबे एवं माता का नाम सहदेई देवी था। इनके पत्नी का नाम जुलेश्वरी देवी था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव के अपर प्राइमरी स्कूल में हुई थी। जब वे आठवीं कक्षा में उच्च विद्यालय बलुआ-नरगदा मे पढते थे, उसी समय श्री कृष्ण सिह के भाषण सुनने गुंडी ग्राम के सभा मे गये थे। भाषण का इन पर इतना प्रभाव पड़ा कि भारत की आजादी की लड़ाई महात्मा गॉंधी के नेतृत्व मे लडने का संकल्प कर लिया।1942 ई० मे भारत छोडो आन्दोलन में 9 अगस्त को महात्मा गॉंधी तथा अन्य नेताओं की गिरफ्तारी हो गयी।ये उस समय हाई स्कूल बलुआ के छात्रावास मे रहकर पढाई कर रहे थे।अखबार में 11 अगस्त 1942 ई० को इन लोगों ने महात्मा गाँधी के गिरफ्तारी का समाचार पढा। " करो या मरो" के नारे के अह्वान पर इन लोगों ने छात्रावास से बडहरा थाना पर धावा बोलकर आन्दोलनकारियों के साथ थाना का समूचा अभिलेख जला दिया। फिर आरा नगर में आकर वे आन्दोलन में सक्रिय रहे। 12 सितम्बर 1942 को कवि कैलाश के घोड़ा देई गाँव स्थित बगीचे मे ये, जंगी लाल तथा लक्ष्मण दूबे सहित 72 आन्दोलनकारियों ने गुप्त बैठक कर कौडिया ग्राम के पास रेल लाईन का पटरी उखाड़ दिया।। इसी दौरान इनको पकड कर आरा रेल थाना मे मुकदमा दर्ज कर , जेल भेज दिया गया। इस मुकदमा मे इन्हें तीन साल की सजा हुई। सजा होने के बाद इन्हें आरा जेल से फुलवारीशरीफ़ कैम्प जेल भेज दिया गया। उसी समय अक्टूबर 1942 मे इनके पुत्र का जन्म हुआ जिनका नाम कृष्णचन्द्र रखा गया। फुलवारीशरीफ़ कैम्प जेल मे उस समय चहारदीवारी नहीं थी बल्कि कांटे दार तार का घेराबंदी था। एक दिन जेल से कुछ कैदियों को भगाने की योजना बनी। तार के घेरे पर पटरी रख कर कैदियों को भगाने मे हरिपाल दूबे की मुख्य भूमिका थी। इन्होंने संतरी डयूटी पर तैनात सिपाही को अचानक ईट की च़ोट से घायल कर बेहोश कर दिया। इसी बीच ग्यारह बंदी पटरी पर चढ़कर कांटेदार तार का घेरा फांदकर फरार हो गये। जेल मे अलार्म बजी। शेष कैदियों की जम कर पिटाई, हुई और हरिपाल दूबे एवं उनके अन्य