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शिक्षा के गुणात्मक सुधार और विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत को विकसित करने के उद्देश्य से कई राज्यों में समाचार पत्र पढ़ना अब अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। इस पहल का मूल लक्ष्य बच्चों को सिर्फ पाठ्यपुस्तक के ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें देश-दुनिया की प्रमुख घटनाओं, समसामयिक मुद्दों और सामान्य ज्ञान से जोड़ना है।
सरकारी विद्यालयों में समाचार पत्र की अनिवार्यता इस सोच से प्रेरित है कि समाचार पत्र एक वास्तविक और विविध स्रोत है जो भाषा, वाचन क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाता है। दैनिक समाचार पढ़ने से विद्यार्थियों का शब्दकोश (vocabulary) मजबूत होता है, जिससे भाषा कौशल में सुधार आता है, और वे नई शब्दावली व बोलचाल की भाषा दोनों को समझने और उपयोग करने में सक्षम होते हैं।
यह अभ्यास विद्यार्थियों को समयानुकूल ज्ञान से परिचित कराता है—राजनीति, विज्ञान, खेल, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण तथा सामाजिक मुद्दों जैसे विषयों पर। इससे पढ़ाई की सीमाओं के बाहर उनकी ज्ञान की दुनिया विस्तृत होती है और वे सामाजिक तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य को बेहतर समझ पाते हैं।
और भी महत्वपूर्ण यह है कि समाचार पढ़ने की आदत से आलोचनात्मक सोच और विश्लेषणात्मक कौशल का विकास होता है। विद्यार्थी सिर्फ समाचार पढ़ते ही नहीं, बल्कि संपादकीय, तर्क-वितर्क और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझना सीखते हैं, जिससे उनकी सोच गहरी और तर्कसंगत बनती है।
इसके अतिरिक्त, सरकारें मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन समय को कम करने तथा विद्यार्थियों को प्रिंट मिडिया के साथ जोड़ने के लिए भी इस नीति को प्रोत्साहित कर रही हैं। रोज़ाना एक निर्धारित समय पर समाचार पत्र पढ़ने की व्यवस्था से बच्चों का ध्यान अध्ययन की ओर जाता है और सीखने की प्रक्रिया और अधिक सक्रिय और रुचिकर बन जाती है।
इस प्रकार, सरकारी विद्यालयों में समाचार पत्र पढ़ना न केवल शिक्षा को जीवन से जोड़ता है बल्कि बच्चों में पठन संस्कृति और विचारशील नागरिकता का विकास भी सुनिश्चित करता है।
