NIRAJ KUMAR JHA (नीरज कुमार झा )
ID: bfadc7c9532dशिक्षा के गुमनाम नायक
- Gender: 👨 Male
- Class / Role: 👩🏫 Teacher
- School: 🏫 UTKRAMIT HIGHER SECONDARY SCHOOL BHAWANIPUR,NARAYANPUR, BHAGALPUR (उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय भवानीपुर,नारायणपुर,भागलपुर )
- District & Block: 📍 BHAGALPUR, NARAYANPUR
- Applied Category: 📝 स्वयं शिक्षक
'स्कूली शिक्षा की चुनौतियाँ'
स्कूली शिक्षा की चुनौतियाँ
शिक्षक हो या विद्यार्थी, जिस भाषा में उनकी जीवनचर्या चलती है, उस भाषा का ऋण उन पर होता है; और यह बात इन दोनों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। क्षेत्रीय भाषा सीखने के साथ-साथ मातृभाषा सीखना उनकी परम आवश्यकता बन जाती है।अतः भाषा की समझ एवं पाठ्यक्रम को सरल, सहज बनाने के लिए आधुनिक युग में नवाचार की आवश्यकता आन पड़ी है।
*चुनौती/समस्याएँ*
एक शिक्षार्थी के रूप में मैंने मुख्यतः हिंदी और संस्कृत भाषा को परंपरागत तरीकों से ही सीखा है। आधुनिक युग की माँग के अनुसार विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों निर्धारित पाठ्यक्रम और भाषाओं के अधिगम के लिए शिक्षा एक बहुत बड़ी चुनौती थी। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक कक्षाओं में भाषा के शिक्षण-अधिगम हेतु व्याख्यान विधि का ही अधिकांशतः प्रयोग किया जाता है। छात्रों को कक्षा उबाऊ और नीरस लगती थी। छात्रों का भी आगमन नियमित रूप से विद्यालय में नहीं होता था। कुछ विषय शिक्षकों के अभाव में कुछ छात्र दोपहर के भोजन के समय घर चले जाते थे।
इस संबंध में छात्रों से जब बात की गई तो उनके कथनानुसार कुछ विषयों का विद्यालय में अध्यापन कार्य न होना था।
*एक शिक्षक के रूप में इसे मैंने चुनौती के रूप में स्वीकार किया और कई नवाचार किए, जो अधोलिखित है—
शिक्षक के रूप में बच्चों के बीच भाषा तथा निर्धारित पाठ्यक्रम के साथ-साथ मैंने कुछ नवाचार किया है,जिसका उद्देश्य शिक्षण-अधिगम सरल, सहज, एवं रोचक बनाना है। भाषा की सीख एवं पाठ्यक्रम को रुचिकर बनाना तथा शिक्षण-अधिगम की नई विधियों से अवगत कराना मेरा लक्ष्य है।
1.मैंने गीत एवं संगीत के माध्यम से पद्य को संगीतबद्ध किया है, जिसमें पाठ्यक्रम में शामिल कविताएँ, सूरदास, तुलसीदास आदि कवियों के पद हैं।मैंने गेय शैली में गाकर बच्चों को सरल एवं मनोरंजक तरीके से सिखाया है।
*प्रभाव* :- इस नवाचार से रचनाकार और उनकी रचना के प्रति छात्रों में रुचि बढ़ी है। अवधी और ब्रजभाषा भी बच्चों को सहज ही याद हो जाती है। इससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर अब वह आसानी से दे पा रहे हैं। दूसरी तरफ, रचनाकारों और उनकी रचना भाषा में वह संबंध भी स्थापित कर पा रहे हैं।
2. बच्चे हिंदी के साहित्यकारों को पहचानें, इसके लिए मैंने पाठ्यक्रम में शामिल सभी रचनाकारों की तस्वीरें उनके नाम के साथ चार्ट पेपर पर प्रदर्शित की हैं।
*प्रभाव* :-अब बच्चे अपने रचनाकारों को पहचानते भी हैं।
3. मैंने कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए संस्कृत विषय शिक्षक के अभाव में उनकी उपस्थिति और स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए श्लोकों का वाचन गेय राग में किया है। छात्र पूर्ण मनोयोग से श्लोकों का श्रवण कर पुनः उसका वाचन कर सरलार्थ को समझ रहे हैं।
*प्रभाव* :-इस नवाचार से जहाँ एक ओर उन्हें श्लोकों की पंक्तियाँ आसानी से याद हो जाती हैं तो दूसरी तरफ वह हर एक पंक्ति के अर्थ को भी सहज रूप में समझकर आत्मसात कर लेते हैं और उसकी व्याख्या कर पाते हैं।
4. आईसीटी (ICT) से हिंदी शिक्षण-अधिगम को जोड़ते हुए समय-समय पर स्मार्ट टीवी के माध्यम से बच्चों को शैक्षिक समस्याओं के समाधान, बोर्ड परीक्षाओं में हिंदी की उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन, अंक-विभाजन आदि से अवगत कराता हूँ, जिससे उन्हें उत्तर लिखने के पैटर्न की जानकारी प्राप्त होती है।
*प्रभाव* :- इस नवाचार से अब बच्चे सटीक उत्तर लिखने में सक्षम हो रहे हैं और वह सफल भी हो रहे हैं।
5. बच्चों में भाषा-अभिव्यक्ति एवं पाठ्यक्रम की समझ विकसित करने के लिए प्रत्येक सप्ताह विशेषकर शनिवार को विभिन्न क्रियाकलापों/गतिविधियों का आयोजन करता हूँ, जिसमें निर्धारित विषय-बिंदुओं पर बच्चे अपनी प्रस्तुति देते हैं तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी देते हैं।
पठन कौशल,लेखन-कौशल,एवं तर्कशक्ति के विकास के उद्देश्य से कहानी-लेखन, अनुच्छेद -लेखन, निबंध- लेखन आदि गतिविधियों का आयोजन करता हूँ।
*प्रभाव*- इस नवाचार में बच्चे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस तरह की गतिविधियों के आयोजन से विद्यालय में जहाँ बच्चों की विषयगत रुचि बढ़ी है, वहीं कक्षा-कक्ष के साथ-साथ विद्यालय के शिक्षण - अधिगम वातावरण में भी काफी सुधार हुआ है। विद्यालय में छात्र उपस्थिति में भी अपेक्षित सुधार हुआ है।
मन में प्रबल इच्छाशक्ति एवं दृढ़ विश्वास हो तो संकल्प अवश्य सिद्ध होता है। एक शिक्षार्थी और एक शिक्षक के रूप में मैं अपने संकल्प की ओर निरंतर अग्रसर हूँ।
नीरज कुमार झा
विद्यालय अध्यापक (11-12)
उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय
भवानीपुर, नारायणपुर, भागलपुर।