Akanksha Lala (Akanksha Lala )
ID: 7319601e39b9शिक्षा के गुमनाम नायक
- Gender: 👩 Female
- Class / Role: 🎓 Class 9
- School: 🏫 Uchch Madhyamik Vidyalaya, Naharniya, Harlakhi, Madhubani (उच्च माध्यमिक विद्यालय, नहरनिया, हरलाखी, मधुबनी )
- District & Block: 📍 MADHUBANI, HARLAKHI
- Applied Category: 📝 स्वयं शिक्षक
नाम नहीं, काम की पहचान...
“नाम नहीं… काम की पहचान!”
हर विद्यालय में कुछ शिक्षक ऐसे होते हैं, जिनकी मेहनत मंच की रोशनी में नहीं आती।
वे चुपचाप बच्चों के बीच अपना काम करते रहते हैं—बिना किसी पुरस्कार की उम्मीद के।
मैं भी शायद उन्हीं गुमनाम शिक्षकों में से एक हूँ।
एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक की जिम्मेदारी केवल किताब का पाठ पूरा कर देना नहीं है। बच्चों को पढ़ाना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना, उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना, विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उन्हें आगे लाना और हर बच्चे की क्षमता को पहचानना—मेरे लिए यही शिक्षण का वास्तविक अर्थ है।
इसी सोच के साथ मैंने अपनी कक्षा के साथ-साथ विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में भी पूरी निष्ठा से योगदान देने का प्रयास किया।
🔬 INSPIRE-MANAK — एक बच्चे के विचार को उड़ान
INSPIRE-MANAK में मैं नोडल शिक्षिका के रूप में बच्चों के साथ जुड़ी। बच्चों के विचारों को सुनना, उन्हें व्यवस्थित करना और उनके विचार को प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत करने में सहयोग करना मेरे लिए एक अलग अनुभव रहा।
इस प्रयास का सबसे सुखद परिणाम तब मिला जब मेरे एक विद्यार्थी का INSPIRE-MANAK के लिए चयन हुआ और उसे ₹10,000 की प्रोत्साहन राशि मिली।
उस बच्चे की आँखों में उस दिन जो आत्मविश्वास था, वही मेरे लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं था।
📚 पढ़ाई में मेहनत का परिणाम
माध्यमिक परीक्षा 2026 में मेरे एक विद्यार्थी ने विज्ञान विषय में 99 अंक प्राप्त किए।
99 अंक केवल एक संख्या नहीं थी।
उसके पीछे बच्चे की मेहनत, लगातार अभ्यास और शिक्षक-विद्यार्थी के विश्वास की कहानी थी।
जब कोई बच्चा कहता है—
“मैम, आपके पढ़ाने से मुझे समझ में आया।”
तो शिक्षक के लिए उससे बड़ा सम्मान शायद कोई नहीं।
🧑🤝🧑 Safe Saturday से जीवन की सीख
Safe Saturday के माध्यम से बच्चों के साथ सड़क एवं रेल सुरक्षा, बाढ़ एवं नाव सुरक्षा, गर्मी, साइबर सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता गतिविधियाँ करवाईं।
बच्चों ने केवल सुना नहीं, बल्कि नाटक, संवाद और प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वयं सीखा और दूसरों को भी सिखाया।
मेरा मानना है कि शिक्षा तब सार्थक होती है जब उसका प्रभाव कक्षा की चारदीवारी से बाहर भी दिखाई दे।
🎭 Science Drama — विज्ञान को किताब से मंच तक
विज्ञान को बच्चों के लिए रोचक बनाने के उद्देश्य से Science Drama जैसी गतिविधियों में बच्चों को जोड़ा।
जो बच्चे पहले मंच पर बोलने से झिझकते थे, वे धीरे-धीरे संवाद बोलने, प्रश्न पूछने और अपनी बात रखने लगे।
उनके बढ़ते हुए confidence को देखना मेरे लिए किसी प्रमाण-पत्र से अधिक महत्वपूर्ण था।
🎨 Drawing Competition और अन्य गतिविधियाँ
Drawing Competition सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं में बच्चों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
किसी बच्चे का पुरस्कार जीतना खुशी देता है, लेकिन उससे भी ज्यादा खुशी तब होती है जब कोई बच्चा पहली बार हाथ उठाकर कहता है—
“मैम, मैं भी participate करूंगा।”
क्योंकि वहीं से आत्मविश्वास की शुरुआत होती है।
🌅 Chetna Satra और बच्चों से जुड़ाव
विद्यालय के Chetna Satra के संचालन में भी अपनी भूमिका निभाई।
सुबह की छोटी-सी सभा को बच्चों के लिए प्रेरणा, अनुशासन और सीख का अवसर बनाने का प्रयास किया।
धीरे-धीरे बच्चों में मंच पर बोलने का आत्मविश्वास बढ़ा।
जो बच्चे पहले पीछे खड़े रहते थे, वे आगे आकर अपनी बात रखने लगे।
📱 FRS App और रोजमर्रा की जिम्मेदारियाँ
विद्यालय के दैनिक कार्यों में FRS App सहित विभिन्न ऑनलाइन एवं शैक्षणिक जिम्मेदारियों को भी पूरी जिम्मेदारी से निभाने का प्रयास किया।
ये ऐसे काम हैं जिनकी शायद ही कभी तस्वीर बनती है, कोई मंच नहीं मिलता और अक्सर कोई तालियाँ भी नहीं बजतीं।
लेकिन विद्यालय की व्यवस्था इन्हीं छोटे-छोटे कामों से आगे बढ़ती है।
❤️ सबसे बड़ा बदलाव — बच्चों में
मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि किसी एक कार्यक्रम का पुरस्कार नहीं, बल्कि बच्चों में आया बदलाव है।
बच्चों की बढ़ती उपस्थिति,
उनके बढ़ते अंक,
कक्षा में बढ़ती सहभागिता,
मंच पर बढ़ता आत्मविश्वास
और सीखने के प्रति बढ़ती रुचि—
यही मेरी मेहनत की असली पहचान है।
कई बार मैंने महसूस किया कि विद्यालय में इतना कुछ करने के बावजूद औपचारिक सम्मान या प्रशंसा मेरे हिस्से में नहीं आई।
एक शिक्षक होने के नाते कभी-कभी मन दुखी भी हुआ।
लेकिन फिर अपने बच्चों को देखा।
उनकी मुस्कान देखी।
उनकी उपलब्धियाँ देखीं।
उनका बढ़ता आत्मविश्वास देखा।
और मन ने कहा—
“शायद मुझे सम्मानित नहीं किया गया,
लेकिन मेरे काम ने मेरे बच्चों को जरूर सम्मान दिलाया।”
तब समझ आया कि हर शिक्षक का नाम पुरस्कार सूची में हो, यह जरूरी नहीं।
कुछ शिक्षक बच्चों की उपलब्धियों में अपना नाम लिखते हैं।
वे मंच पर सम्मानित नहीं होते,
लेकिन बच्चों के भविष्य को आकार देते हैं।
वे अखबारों की सुर्खियाँ नहीं बनते,
लेकिन किसी बच्चे की सफलता की कहानी का एक अनदेखा हिस्सा जरूर होते हैं।
मैं आज भी उसी विश्वास के साथ काम करती हूँ—
सम्मान मिले तो खुशी होगी,
लेकिन बच्चों का आगे बढ़ना ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
क्योंकि एक शिक्षक के लिए सबसे सुंदर क्षण वह होता है जब उसका विद्यार्थी उससे आगे बढ़कर कहता है—
“मैम, आपने मुझ पर विश्वास किया था।”
और शायद यही है—
🌟 शिक्षा का असली गुमनाम नायक 🌟
नाम नहीं…
काम की पहचान!