Prem Nath Mourya (प्रेम नाथ मौर्य )
ID: f5046de8ea45

NMMSS 2025–26 के सितारे: संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा

  • Gender: 👨 Male
  • Class / Role: 🎓 Class 8
  • School: 🏫 M.S Udangharari (मध्य विद्यालय उदनघरारी )
  • District & Block: 📍 KHAGARIA, ALAULI
  • Applied Category: 📝 Teachers
विशिष्ट शिक्षक

बदलते समय में शिक्षा में सुधार यह कहानी नहीं । एक प्रयोग हैं । अक्सर शिक्षक दूसरों में खामियाँ खोजते हैं । कि पढ़ाई का स्तर नीचे कौन गिरा रहे हैं ?  किसने कितनी गलती लिखीं या सही । लेकिन वास्तविक जिन्दगी अपनी ग़लती को ढूंढनें में काश लगाते, तो आज का समाज इतना स्वार्थी नहीं होता । अक्सर हम पढ़ें - लिखें लोगों ने बच्चों को किताब में सिमटकर रखने की प्रवृत्ति से मुक्त होकर कभी सोचा ही नहीं । आखिर क्यों सोचूं ? अच्छा वेतन मिल रहा हैं । परिवार ठीक से चल रहे हैं । बस इतना आसान जिन्दगी अपनी । फ़िर किस कारण से दूसरे से दुश्मनी मोल लूं । अच्छा पढ़ाया, तो समाज के कुछ दबंग लोग कहेंगे, कि ई मास्टर बा लगे छे कि अब कुछ दिन रहवे करते । सबके दारोगा,sp, बनाकर ही जाते । फ़िर क्या विद्यालय प्रधान के आँखों में कांटे की चुभता हुआ ? वो शिक्षक बनकर एक आदर्श जीवन में आ जाते हैं । यहीं सच्चाई है मेरी । टी ई टी की उत्तीर्ण 2012 में जोश के साथ जीवन में कुछ अलग उमँग से शिक्षक बनकर आए । लेकिन विभाग के चक्कर में इस तरह उलझे कि दौड़ते रहें ।अब तक कितने प्रशिक्षण कर चुका हूं । लेकिन विद्यालय से जुड़े आजतक समस्या का समाधान नहीं मिला । हमारे विद्यालय दलित समुदाय में है और वहां पर बच्चों की आर्थिक स्थिति उसके परिवार पर निर्भर करता हैं । हम सिर्फ़ उसके सोचने की तरीके में बदलाव लाना चाहते हैं, लेकिन हम कुछ परिवर्तन ही कर सकें । शायद ही मैट्रिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ हो । क्यों जब प्रथम श्रेणी में पास होने की बात किए , तो सभी हमारे ओर देखने लगा । कहीं हम से कोई गलती नहीं हुई । बोले नहीं । गाँव में रहकर प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होना। सिर्फ़ घर की तैयारी से सम्भव हो गया । परीक्षा देने के बाद उसे प्रथम श्रेणी नहीं, द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने की बात की । लेकिन जब कई छात्र छात्राएं प्रथम श्रेणी आए । ख़ुशी से रो पड़े । उस गांव से पहले कई छात्र प्रथम श्रेणी में पास हुए । हम शिक्षक के पास कुछ नहीं हैं सिर्फ अगर बच्चों को सही से मार्गदर्शक बन सकूं । यहीं हमारे लिए काफ़ी है । शिक्षक हूँ , ज़िद्दी हूँ । अड़े रहता हूँ , पढ़ाई के प्रति । बस इतना ही आदत खराब है कि हमें चापलूसी करना नहीं सीखा हूँ । इसलिए बदनाम हूँ । विद्यालय हो या किसी कर्त्तव्य स्थल ससमय पर पहुंचने की आदत है । काश हमारे पास कुछ बदलाव करने का अधिकार होता । समय ने शिक्षक को पाठ टीका तक सीमित कर दिए । बदलते समय में शिक्षा अधिकार शिक्षकों को खुलकर प्रयोग करने की आज़ादी दें । स्वार्थी समाज से मानव समाज का निर्माण कर सकूं। बस इसी उम्मीद में.......

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