SOURABH KUMAR (सौरभ कुमार )
ID: b6e66c5f708aNMMSS 2025–26 के सितारे: संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक यात्रा
- Gender: 👨 Male
- Class / Role: 👩🏫 Teacher
- School: 🏫 M S Basmatia (मध्य विद्यालय बसमतिया )
- District & Block: 📍 ARARIA, NARPATGANJ
- Applied Category: 📝 Teachers
NMMSS परीक्षा में मध्य विद्यालय बसमतिया के बच्चों की सफलता की प्रेरक कहानी
मध्य विद्यालय बसमतिया में मेरी नियुक्ति हुए उस समय लगभग 14-15 माह ही हुए थे। मेरे मन में एक दृढ़ इच्छा थी कि विद्यालय के बच्चों के लिए कुछ ऐसा किया जाए, जिससे वे प्रारम्भिक स्तर पर ही समझ सकें कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाएँ उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बन सकती हैं।
मुझे आज भी जुलाई का वह महीना याद है, जब मैंने प्रधानाध्यापक महोदय से चर्चा करते हुए आग्रह किया कि मुझे कक्षा 8 के कुछ गंभीर एवं परिश्रमी विद्यार्थी चाहिए, जिन्हें मैं राष्ट्रीय आय-सह-मेधा छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) परीक्षा की तैयारी करा सकूँ। उन्होंने बिना किसी विलम्ब के मेरे प्रस्ताव का समर्थन किया। चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों को विद्यालय बुलाया गया, उन्हें इस परीक्षा की महत्ता समझाई गई और इसके बाद नियमित तैयारी की शुरुआत हुई।
इस अभियान के प्रारम्भिक चरण में मुझे सकल सर का भरपूर सहयोग मिला। उन्होंने इसी विद्यालय से अपनी प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की थी और वर्तमान में समीपस्थ सीआरसी के प्राथमिक विद्यालय भैरोगंज में कार्यरत हैं। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
समय के साथ तैयारी आगे बढ़ती रही। इसी दौरान विभिन्न राज्यों में NMMSS परीक्षा के आवेदन प्रारम्भ हो चुके थे। बच्चों में उत्सुकता भी बढ़ रही थी। कुछ बच्चे मुझसे पूछते थे, “सर, कई राज्यों में तो आवेदन की अंतिम तिथि भी निकल गई, फिर हम किस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं?” मैं उन्हें धैर्य रखने और मुझ पर विश्वास बनाए रखने की सलाह देता था। मैं कहता था, “हमारे राज्य में अभी आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। समय आने पर सब कुछ होगा, बस तैयारी जारी रखो।”
बच्चों का उत्साह और समर्पण देखकर विद्यालय के कई अन्य शिक्षकों का सहयोग भी लगातार मिलता रहा। विशेष रूप से शशि सर, श्याम सर और संतोष सर का योगदान अविस्मरणीय है। यदि व्यक्तिगत रूप से कहूँ तो इस परीक्षा की तैयारी के लिए मैंने विद्यालय समय के अतिरिक्त लगभग 400 से 500 घंटे दिए। यही कारण था कि बच्चों की सफलता मेरे लिए केवल एक परिणाम नहीं, बल्कि मेरे समर्पण और परिश्रम का भी प्रतिफल थी।
आखिरकार वह समय भी आ गया, जब आवेदन पत्र, परीक्षा तिथि और अन्य आवश्यक जानकारियाँ बच्चों के सामने थीं। हमने अपनी मेहनत और अधिक बढ़ा दी। इसी दौरान TOB के माध्यम से मेरी मुलाकात एक ऐसे शिक्षक से हुई, जो धीरे-धीरे मेरे लिए केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बन गए। वे थे सिवान के प्रताप सर।
NMMSS परीक्षा की तैयारी में उन्होंने जिस प्रकार का सहयोग प्रदान किया, वह वास्तव में अनुकरणीय है। शायद ही कोई शिक्षक किसी दूसरे विद्यालय के बच्चों और शिक्षक के लिए इतना समर्पित होकर कार्य करता हो। उन्होंने अपने एक दशक से अधिक के अनुभव को हमारे साथ साझा किया और बच्चों के लिए अथक परिश्रम किया। इसके लिए मैं सदैव उनका ऋणी रहूँगा।
परीक्षा फॉर्म भरने से लेकर टेस्ट पेपर की व्यवस्था और एडमिट कार्ड डाउनलोड करने तक, जितने भी ऑनलाइन कार्य थे, उनमें संतोष सर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका योगदान भी कभी भुलाया नहीं जा सकता।
परीक्षा की तिथि अब बिल्कुल निकट थी। मुझे विश्वास था कि जितनी मेहनत बच्चों ने और हमने मिलकर की है, उसके आधार पर कम-से-कम 6 से 7 बच्चों की सफलता निश्चित है। तैयारी के अंतिम चरण में कई मॉक टेस्ट आयोजित किए गए। इसी दौरान हमारे प्रधानाध्यापक श्री भूपेन्द्र बैठा जी ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए घोषणा की कि जिन विद्यार्थियों का प्रदर्शन मॉक टेस्ट में सर्वश्रेष्ठ रहेगा, उन्हें परीक्षा केंद्र तक ले जाने का पूरा खर्च वे स्वयं वहन करेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि जो बच्चे इस परीक्षा में सफल होंगे, उन्हें वे अपनी ओर से कहीं घुमाने भी ले जाएंगे। यह उनके बच्चों के प्रति प्रेम, लगाव और समर्पण का सुंदर उदाहरण था।
परीक्षा से एक दिन पूर्व मैंने सभी विद्यार्थियों को एकत्रित कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा परीक्षा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्देश विस्तार से समझाए। अगले दिन हम सभी परीक्षा केंद्र के लिए रवाना हुए। बच्चों के चेहरे पर उत्साह, आत्मविश्वास और उम्मीद स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
हालाँकि तैयारी और मेहनत अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन परीक्षा का दबाव एक अलग चुनौती होती है। हमारे कुछ बच्चे इस दबाव को उतनी प्रभावी ढंग से संभाल नहीं सके। यही कारण रहा कि परिणाम मेरी अपेक्षा के अनुरूप नहीं आ सका। जिस विद्यार्थी, शिवम कुमार सोनी, ने लगभग सभी मॉक टेस्ट में सर्वोच्च प्रदर्शन किया था, वह इस परीक्षा में सफलता प्राप्त नहीं कर सका।
फिर भी, प्राची पल्लवी, श्वेता रानी और सूरज कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता प्राप्त की और विद्यालय का नाम गौरवान्वित किया।
जो बच्चे इस परीक्षा में सफल नहीं हो सके, उनके लिए भी मेरे मन में उतना ही सम्मान और स्नेह है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस तैयारी के दौरान उन्होंने जो ज्ञान, अनुशासन, आत्मविश्वास और संघर्ष करने की क्षमता अर्जित की है, वह उनके जीवन में आगे अवश्य सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगी।
यदि कहीं कोई कमी रही होगी तो उसमें मेरे अनुभव और मार्गदर्शन की भी कुछ सीमाएँ रही होंगी। भविष्य में मैं उन कमियों को दूर करने का पूरा प्रयास करूँगा, ताकि आने वाले वर्षों में और अधिक विद्यार्थी इस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकें।
अंत में, मैं सभी सफल एवं असफल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की हृदय से मंगलकामना करता हूँ। सफलता और असफलता जीवन की यात्रा के केवल पड़ाव हैं; वास्तविक महत्व निरंतर सीखने, प्रयास करने और आगे बढ़ते रहने में है।
सौरभ कुमार
विद्यालय अध्यापक
मध्य विद्यालय बसमतिया
नरपतगंज, अररिया