MADHU KUMARI (मधु कुमारी )
ID: 7ad45c4fdc96अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर आलेख लेखन एवं संस्मरण लेखन प्रतियोगिता
- Gender: 👩 Female
- Class / Role: 🎓 Class 5
- School: 🏫 P S JAYANTI GRAM AUTA GOGRI KHAGARIA BIHAR (प्राथमिक विद्यालय जयंती ग्राम औता गोगरी खगड़िया बिहार )
- District & Block: 📍 KHAGARIA, GOGRI
- Applied Category: 📝 Teacher
School Teacher
योग ने मेरे जीवन में कैसे बदलाव लाया
योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन को नई दिशा देने वाली एक ऐसी पद्धति है जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती है। मैंने योग की शक्ति को केवल पुस्तकों में नहीं पढ़ा, बल्कि अपने परिवार में उसके चमत्कारिक प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से देखा है। यह अनुभव मेरे जीवन का एक ऐसा स्मरणीय प्रसंग है जिसने योग के प्रति मेरी आस्था को और भी दृढ़ बना दिया।
कुछ वर्ष पहले मेरे भतीजे के साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। मेरा भतीजा भारतीय सेना में कार्यरत था। वह एक तेज-तर्रार, अनुशासित और शारीरिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ युवक था। उसकी दिनचर्या नियमित थी और वह अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करता था। परिवार को उस पर गर्व था और उसके उज्ज्वल भविष्य की अनेक योजनाएँ थीं।
एक दिन गर्मी के मौसम में वह अपनी ड्यूटी पूरी करके घर लौटा। तेज धूप और अत्यधिक गर्मी के कारण उसका शरीर बहुत गर्म था। घर आते ही उसने बिना अधिक सोच-विचार किए अपने सिर पर ठंडे झरने के पानी से स्नान कर लिया। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ ही समय में वह बेहोश होकर गिर पड़ा। जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो पता चला कि उसे लकवा (पैरालिसिस) का गंभीर आघात हुआ है।
यह समाचार पूरे परिवार के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं था। जो युवक कुछ घंटे पहले तक पूरी तरह स्वस्थ था, वह अचानक दूसरों पर निर्भर हो गया। उसके हाथ-पैर ठीक से काम नहीं कर रहे थे, बोलने में कठिनाई हो रही थी और सामान्य जीवन जीना लगभग असंभव हो गया था।
इसके बाद शुरू हुआ इलाज का लंबा और कठिन दौर। मेरे बड़े भाई अपने पुत्र को लेकर अनेक चिकित्सकों और अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। बड़े-बड़े शहरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लिया गया। अनेक प्रकार की दवाइयाँ, जाँच और उपचार किए गए। इस प्रक्रिया में बहुत समय, श्रम और धन व्यय हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी इसका प्रभाव पड़ा। सबसे अधिक पीड़ा इस बात की थी कि लगातार उपचार के बावजूद अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे थे।
दिन बीतते गए, लेकिन सुधार की गति बहुत धीमी थी। कभी-कभी ऐसा लगता था कि शायद अब जीवन पहले जैसा नहीं हो पाएगा। परिवार के सभी सदस्य मानसिक तनाव और चिंता से घिरे हुए थे। इसी दौरान किसी परिचित ने हमें हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आयुर्वेदिक उपचार और योग चिकित्सा के बारे में जानकारी दी।
परिवार ने अंतिम आशा के रूप में वहाँ जाने का निर्णय लिया। मेरे भतीजे को हरिद्वार ले जाया गया, जहाँ उसकी विस्तृत जाँच की गई। वहाँ आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने उसकी स्थिति को समझकर उपचार प्रारंभ किया। साथ ही उसे नियमित रूप से योगाभ्यास, प्राणायाम और विशेष व्यायाम करवाए जाने लगे।
शुरुआत में योग करना उसके लिए बहुत कठिन था। शरीर उसका साथ नहीं देता था, लेकिन प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से उसने धीरे-धीरे अभ्यास जारी रखा। प्रतिदिन प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति तथा अन्य योग क्रियाओं का अभ्यास कराया जाता था। आयुर्वेदिक औषधियों के साथ योग का यह संयोजन धीरे-धीरे अपना प्रभाव दिखाने लगा।
कुछ महीनों बाद उसके स्वास्थ्य में आश्चर्यजनक परिवर्तन दिखाई देने लगे। पहले जो व्यक्ति स्वयं बैठ भी नहीं पाता था, वह अब सहारे से चलने लगा। उसकी बोलने की क्षमता में सुधार हुआ। हाथों की गति बेहतर होने लगी। उसका आत्मविश्वास लौटने लगा। परिवार के चेहरे पर फिर से उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी।
समय के साथ योग और आयुर्वेदिक उपचार का प्रभाव और स्पष्ट होता गया। आज स्थिति यह है कि मेरा भतीजा स्वयं चल-फिर सकता है, बैठ सकता है, उठ सकता है, भोजन कर सकता है और समाचार-पत्र भी पढ़ सकता है। यद्यपि वह अभी पूर्णतः पहले जैसा नहीं हुआ है, फिर भी जो सुधार हुआ है वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिस स्थिति में डॉक्टरों ने सीमित संभावनाएँ बताई थीं, वहाँ योग ने उसे एक नया जीवन प्रदान किया।
इस घटना ने मेरे जीवन की सोच बदल दी। पहले मैं योग को केवल स्वास्थ्य बनाए रखने का एक साधन मानती थी, लेकिन अब मुझे समझ में आया कि योग व्यक्ति के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। योग केवल शरीर को स्वस्थ नहीं बनाता, बल्कि मन को भी दृढ़ बनाता है। यह कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष करने की शक्ति देता है।
आज मैं स्वयं भी नियमित रूप से योग करने का प्रयास करती हूँ और अपने विद्यार्थियों तथा परिचितों को भी योग अपनाने के लिए प्रेरित करती हूँ। मेरा विश्वास है कि यदि योग को हमारी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। योग न केवल रोगों के उपचार में सहायक है, बल्कि रोगों की रोकथाम का भी प्रभावी माध्यम है।
अंततः मैं यही कहना चाहूँगी कि मेरे भतीजे का जीवन योग की परिवर्तनकारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है। योग ने उसे निराशा से आशा की ओर, असहायता से आत्मनिर्भरता की ओर और बीमारी से स्वास्थ्य की ओर अग्रसर किया। यह अनुभव मेरे लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। वास्तव में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को बदलने वाली एक महान जीवनशैली है। इसलिए हमें अपने जीवन में योग को अपनाकर स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन की ओर बढ़ना चाहिए।
"योग से ही निरोग जीवन संभव है, और योग ही जीवन को नई दिशा देने की शक्ति रखता है।"