Patna, Bihar, India An Education Community Initiative
Rahul Raj (राहुल राज )
ID: ee917d4e71de

शिक्षा के गुमनाम नायक

  • Gender: 👨 Male
  • Class / Role: 🎓 Class 5
  • School: 🏫 M.s.satiyara Bharamarpur (मध्य विद्यालय सतीयारा भ्रमरपुर नारायणपुर )
  • District & Block: 📍 BHAGALPUR, NARAYANPUR
  • Applied Category: 📝 स्वयं शिक्षक
Competition Photos
100 रुपया vs भविष्य

21-11-2023 का वो दिन जब खुशी और घबराहट के साथ मैने विद्यालय में अपना योगदान दिया । खुश इसलिए था क्यों कि आज से मैं बेरोजगार नहीं था और घबराहट इसलिए हो रही थी क्यों कि मैने अपने विद्यालय की स्थिति को एक दिन पहले आके देख चुका था । मेरा विद्यालय सुदूर ग्रामीण इलाके में था जहां न ही विद्यालय के पास कुछ खास सुविधा थी और न है वहां के लोगों के पास ।  बच्चों के माता पिता बच्चे को विद्यालय भेजने के बदले खेतों में काम करने ले जाते थे । विद्यालय में पूर्व में शिक्षकों की संख्या भी मात्र 3 ही थी तो पढ़ाई भी नहीं हो पाती थी , इसलिए जो थोड़े बच्चे आते थे वो भी बस खाना और पोषक राशि की सोच रख के आते थे और मध्यान भोजन के बाद घर चले जाते थे। 

            मेरे साथ कुल 4 शिक्षकों ने योगदान दिया था उस दिन बच्चों और गांव वाले काफी खुश थे उनको काफी उम्मीद थी कि अब बदलाव हो। मैने सबसे पहले बच्चों से बात की सबसे कहा कि आपलोग ज्यादा संख्या में विद्यालय आइये ओर अपने मित्रों को भी आने को बोलिये। हम सभी नए शिक्षक  विद्यालय को बदलने की बात ठान ली थी और इसके लिए मुझे बच्चों को विद्यालय लाने की जिम्मेदारी मिली क्यों कि एक तो मैं अनसब में सबसे युवा था और बच्चे मुझसे ज्यादा जुड़ रहे थे । मैं भी अपने कर्तव्य को निभाने का पूर्ण प्रयास किया जिसके लिए रोज मैं कई पुराने अनुभवी शिक्षकों से बात करता। मैंने सर्व प्रथम बच्चों को समझाने का प्रयास किया कि अभी 100 रुपये कमा के खुश होगे तो जीवन भर इतना में ही गुजारा करना होगा इसलिए अभी इसको छोड़ के पढ़िए करो किंतु बच्चों के मां बाप गरीब थे तो वो उन्हें खेत ले जाते थे अपने साथ कम करने। इस चीज को रोकने के लिए घर घर घूमने का फैसला लिया और सभी शिक्षकों से कहा साथ ही हमने ये फैसला लिये कि इसमें हम गांव के किसी प्रतिनिधि या अच्छा कमाने वाले लोगों को भी साथ में लेंगे । हमने वही किया प्रतिनिधियों के साथ घर घर घूमे जिसका अच्छा असर हुआ और बच्चे पहले की तुलना में ज्यादा संख्या में विद्यालय आने लगे । अभी भी कई बच्चे या तो घर में कंचे खेलते थे या खेतों में जाते थे तो मैने अब उनके खेते विद्यालय के बीच के समय में जाने का निश्चय किया और जब मैं विद्यालय के समय में गया तो बहुत से बच्चे अपने घरों में खेलते मिले और बहुत से खेत में भी मिले । मैने उनके मां के सामने में उनको समझाया और उनके मां को भी समझाया कि आप मजदूरी कर रहे हैं यदि कुछ पैसे के लिए अपने बच्चों को भी मजदूरी करवाइयेगा तो इसके आने वाले बच्चे तो इसके साथ मजदूरी हो करेंगे इसलिए इनको पढ़ने दीजिए । ये विद्यालय के समय में घर घर खेत खेत जाने का क्रम लगातार रखा जिसके असर से अब बच्चों की उपस्थिति अच्छी हो गई थी । मैने इस चीज को बना के रखने के लिए अपने प्रधानाध्यक से बात कर के मीटिंग रखी और अभिभावकों से बच्चों की उपस्थिति को बना के रखने की अपील की । अभिभावक का मानना था कि बच्चे काम करेंगे तो पैसे आयेंगे घर में पढ़ के कुछ नहीं होता है इस मनसा को तोड़ने के लिए मैने उनके गांव के दरोगा जी को भी बुलाया था और उनसे भी मीटिंग में लोगों से अपील करने को कहा। हमने स्कूल में सभी घंटी की पढ़ाई शुरू की वर्ग कक्ष कम थे तो कुछ क्लास साथ में शुरू किए । कमजोर बच्चों के लिए अलग से समय देते थे कई बार उनको सिखाने का मौका उनके साथियों को भी देते थे । हमने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल का भी सोचा किंतु जगह नहीं था फिर भी हमने वर्ग कक्ष के अंदर ही कई तरह के खेल का प्रबंध अपने प्रधानाध्यपक से कह के करवाया । सभी शिक्षकों से पढ़ाई के दौरान खुशनुमा वातावरण रखना तथा बच्चों के गांव समाज के वैसे लोग जो पढ़ाई के दम पर ऊंचे स्थान को प्राप्त कर चुके हैं उनके बारे में चर्चा करने को कहा । बच्चों के छोटे मोटे  उपल्ब्धि, सर्वाधिक उपस्थिति को हमने प्रार्थना सत्र में उपहार से सम्मानित करना आरंभ किया कई बार बच्चों के साथ साथ उनके माता पिता को भी विद्यालय के द्वारा सम्मानित किया गया । 

                     अब बच्चे सरकार की मानक प्रतिशत से ज्यादा संख्या में विद्यालय आते हैं। हमलोग के द्वारा जलाया गया अलख तब मुकम्मल होता देखने को मिला जब उस गांव से पहली बार एक लड़की 10वी की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त की और उसे सरकार की तरफ से 10000रुपए मिले । वह लड़की अपने मां के साथ  खुशी से विद्यालय आयी उसके मां ने  कहा आपलोग मनोबल नहीं बढ़ाया होता तो कभी भी आठवीं के बाद पढ़ाई नहीं करने देते ।  अब इस विद्यालय से मेरा ट्रांसफर हो गया है किंतु उम्मीद है बच्चे आज भी विद्यालय उसी लग्न से जाते होंगे।