Patna, Bihar, India An Education Community Initiative
Dr Gurudas Prajapati (डॉ गुरुदास प्रजापति )
ID: 6da030163127

शिक्षा के गुमनाम नायक

  • Gender: 👨 Male
  • Class / Role: 👩‍🏫 Teacher
  • School: 🏫 UHSS KEWA CHAINPUR (उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय केवा, चैनपुर )
  • District & Block: 📍 KAIMUR (BHABUA), CHAINPUR
  • Applied Category: 📝 स्वयं शिक्षक
Competition Photos
School teacher

अंधियारे पथ पर निष्ठा का संबल: केवा चैनपुर विद्यालय की गाथा


जब मैंने कैमूर जिले के उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, केवा चैनपुर के प्रांगण में कक्षा 11-12 के शिक्षक के रूप में अपने कदम रखे, तो स्थिति अत्यंत दयनीय और विहंगम चुनौतियों से भरी थी। पठन-पाठन की कश्ती जैसे-तैसे हिचकोले खा रही थी। कक्षाओं एवं शिक्षकों का घोर अकाल था और विद्यार्थियों की उपस्थिति 'ऊँट के मुँह में जीरा' समान थी। जो गिने-चुने छात्र आते भी थे, वे मध्यांतर होते ही रफूचक्कर हो जाते थे। विद्यालय की चहारदीवारी न होने के कारण बच्चे 'खग उड़ने' की भांति मुख्य मार्ग की ओर भाग जाते थे। चूंकि विद्यालय सीधे मुख्य सड़क से सटा हुआ था, इसलिए हर क्षण अबोध बालकों के जीवन पर दुर्घटना का काल मंडराता रहता था। व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी हुई थी, किंतु मैंने हार मानने के बजाय कमर कस ली।

भागने वाले विद्यार्थियों को रोकने के लिए मैंने 'अंकुश' लगाने की नीति अपनाई। अनुपस्थित और पलायन करने वाले बच्चों की सूची बनाकर सीधे उनके अभिभावकों से संपर्क साधना आरंभ किया। इस प्रयास से अभिभावक कुंभकर्णी नींद से जागे और बच्चों में अनुशासन का सूत्रपात हुआ। परंतु, केवल कड़ाई से विद्या का उपवन नहीं सींचा जा सकता। मैंने शिक्षा को रटने की रूढ़िवादी परिपाटी से मुक्त कर मनोरंजन, क्रीड़ा और सामूहिक गतिविधियों का ताना-बाना बुना। विद्यार्थियों के भीतर सुप्त पड़ी प्रतिभा को जगाने के लिए मैंने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की नींव रखी। उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूहों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणियों में पुरस्कृत करना प्रारंभ किया। इस पुरस्कार योजना ने बच्चों के भीतर 'घी का काम किया' और उनकी ज्ञान-पिपासा जाग उठी। अब बच्चे विद्यालय से भागते नहीं, बल्कि विद्यालय आने के लिए आतुर रहने लगे। इसी अनुशासित और ऊर्जस्वित माहौल का परिणाम है कि आज इस सुदूर क्षेत्र के बच्चे बोर्ड परीक्षाओं में अपने ज्ञान का लोहा मनवाते हुए जिला तथा ब्लॉक स्तर पर अपना शीर्ष स्थान सुनिश्चित करते हैं।

सड़क जनित खतरों से बच्चों को महफूज रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता थी। इसके लिए मैंने विद्यालय के प्रधानाध्यापक महोदय के साथ सुर में सुर मिलाया और प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को अपनी व्यथा से अवगत कराते हुए आवेदन पत्र सौंपा। अथक प्रयासों से बाउंड्री निर्माण की स्वीकृति तो मिल गई, परंतु उसे अमली जामा पहनाना लोहे के चने चबाने जैसा था। मैंने, प्रधानाध्यापक जी ने और हमारे कर्मठ साथी शिक्षक श्री राजेश कुमार जी ने रात-दिन एक कर दिया। जब भी आवश्यकता पड़ी, हम तीनों शिक्षक रात्रि बारह- एक बजे तक घने अंधकार में भी डटे रहे और ईंट-गारे के बीच अपनी रीढ़ की हड्डी गलाते रहे। अंततोगत्वा, हमारे पसीने की बूंदों ने रंग दिखाया और विद्यालय को एक सुरक्षित चहारदीवारी का सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ।

बिहार की हाड़ कंपाने वाली ठंड में जब रूह कांप जाती थी, तब कई निर्धन नौनिहाल बिना जूते-मोजे के, नंगे पैर विद्यालय आने को विवश थे। ठंड से ठिठुरते उन मासूमों की दशा देखकर मेरा कलेजा मुंह को आ गया। मैंने स्वयं पहल करते हुए अपने शिक्षक बंधुओं के अंतःकरण को झकझोरा। हम सभी ने अपनी गाढ़ी कमाई से स्वैच्छिक चंदा एकत्रित किया और उन विपन्न बच्चों के लिए 'जूता-मोजा वितरण अभियान' का श्रीगणेश किया। यह आत्मीय अनुष्ठान पिछले 3 वर्षों से अनवरत, निर्बाध रूप से चल रहा है। आज हमारी पूरी शिक्षक मंडली एकजुट होकर अभिभावकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर दूरभाष पर संवाद करती है, जिससे उपस्थिति का ग्राफ आसमान छू रहा है।

मैंने केवल किताबी ज्ञान तक खुद को सीमित नहीं रखा। विद्यालय में क्विज़, पोस्टर मेकिंग, स्वच्छता जागरूकता अभियान और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते नाटकों का मंचन मेरे अभिन्न अंग बन चुके हैं। विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में तो हमारे विद्यार्थियों ने सफलता के नए प्रतिमान गढ़े हैं। मेरे मार्गदर्शन में विज्ञान प्रोजेक्ट का निर्माण करते हुए हमारे विद्यालय के छात्र जिला स्तर से चयनित होकर दो-दो बार राज्य की राजधानी पटना पहुंचे। अत्यंत गौरव का विषय है कि हमारी एक मेधावी छात्रा का चयन राष्ट्रीय स्तर पर भी हुआ, जिसने विद्यालय का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा दिया।

वर्तमान में हमारी ज्ञान-साधना एक अत्यंत आधुनिक और युगांतकारी प्रोजेक्ट पर केंद्रित है। हम छात्रों के साथ मिलकर तथा अन्य शिक्षकों की सहायता लेकर क्वांटम फिजिक्स एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अनूठे मिश्रण से एक ऐसा यंत्र तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं, जो हमारी पारंपरिक कृषि, किसानी और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में क्रांति का सूत्रपात करेगा। मेरा अंतर्मन गवाही दे रहा है कि यह महती परियोजना इस बार भी जिला स्तर को लांघकर राज्य स्तर पर अपनी विजय पताका फहराएगी और शीर्ष स्थान प्राप्त करेगी। हम सभी शिक्षक अपनी सुरक्षा, स्वार्थ और सुखों को तिलांजलि देकर, इस विद्यालय को ज्ञान का वो कल्पवृक्ष बनाने में जुटे हैं, जिसकी छांव में आने वाला हर बच्चा राष्ट्र का गौरव बन सके। यह यात्रा अनवरत जारी है।