Dipti Ansu (दीप्ति अंशु )
ID: 3ac4f4205bc6शिक्षा के गुमनाम नायक
- Gender: 👩 Female
- Class / Role: 👩🏫 Teacher
- School: 🏫 U.U.M.V Karai, Naubatpur,Patna (उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय,कराई, नौबतपुरउत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय,कराई, नौबतपुर )
- District & Block: 📍 PATNA, NAUBATPUR
- Applied Category: 📝 स्वयं शिक्षक
Ek shikshika ka sankalp
एक शिक्षिका का संकल्प
नौबतपुर के कराई गाँव में स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय के अहाते में जब तीन साल पहले दीप्ति अंशु ने कदम रखा था, तो चुनौतियाँ पहाड़ जैसी थीं। विद्यालय में कक्षा 12वीं के कमरों में सन्नाटा पसरा रहता था, बच्चों की उपस्थिति उंगलियों पर गिनने लायक थी और ग्रामीण परिवेश के उन बच्चों के लिए 'अंग्रेजी' किसी हौवे से कम नहीं थी। विषय के प्रति उनकी रुचि न के बराबर थी। लेकिन दीप्ति ने हार मानने के बजाय एक शिक्षिका के सच्चे दायित्व को निभाने का संकल्प लिया।
उन्होंने सबसे पहले अंग्रेजी के डर को बच्चों के दिलों से निकालने का बीड़ा उठाया। पारंपरिक रटने की पद्धति को ताक पर रखकर उन्होंने एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग (गतिविधि आधारित शिक्षण) की शुरुआत की। अंग्रेजी की कठिन और नीरस लगने वाली कविताओं को उन्होंने सुरीली तानों और गायन शैली में पिरो दिया। बच्चे जो कल तक अंग्रेजी की किताब छूने से कतराते थे, अब गुनगुनाते हुए कविताएं याद करने लगे। दीप्ति यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने बच्चों से व्यक्तिगत संवाद किया, उनकी कमियों को समझा और उनके बुनियादी स्तर (Basic level) पर काम करना शुरू किया। व्याकरण का जो 'ग्रामेटिकल पोर्शन' बच्चों को डराता था, उसे इतना सुगम बना दिया कि देखते ही देखते वही बच्चे Voice और Narration जैसे कठिन विषयों के सवालों को चुटकियों में हल करने लगे। इस आधुनिक सफर को और आसान बनाया विद्यालय की आईसीटी (ICT) लैब और प्रोजेक्टर ने, जिसने बच्चों के सीखने के स्तर को एक नई उड़ान दी।
दीप्ति के इस समर्पण का असर बच्चों की उपस्थिति पर दिखने लगा, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि अभी भी कुछ लड़कियां विद्यालय नहीं आ पा रही हैं। जब उन्होंने पेरेंट्स-टीचर मीटिंग (PTM) में अभिभावकों से बात की और खुद बच्चियों के घर का पता लगाया, तो असलियत सामने आई। लड़कियां घर से अकेले दूर आने में झिझकती थीं। दीप्ति ने इसका एक अनोखा उपाय निकाला; उन्होंने आस-पास रहने वाली लड़कियों की टोलियां बना दीं और उन्हें साथ मिलकर स्कूल आने के लिए प्रेरित किया। इस छोटे से प्रयास ने छात्राओं की उपस्थिति में एक जादुई बदलाव ला दिया।
कक्षा के भीतर का डर तो दूर हो चुका था, लेकिन बच्चों के भीतर मंच पर आने की एक गहरी झिझक (Stage fear) बाकी थी। इसे तोड़ने के लिए दीप्ति ने सुबह के चेतना सत्र (School Assembly) को अपना हथियार बनाया। उन्होंने प्रार्थना सभा में रोज़ नए विचार, समाचार वाचन, सामूहिक देशभक्ति गीत, कम्युनिटी सॉन्ग और यहाँ तक कि एरोबिक्स (Aerobics) जैसी गतिविधियों को शामिल किया। जो बच्चे कभी सिर झुकाकर पीछे खड़े रहते थे, आज वे पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर आकर अपनी भावनाओं को प्रेषित करने में सक्षम हो चुके थे।
एक कुशल मार्गदर्शक की तरह दीप्ति ने उन बच्चों पर भी विशेष ध्यान दिया जो अपनी राह से भटके हुए थे। उन्होंने उनकी ऊर्जा को दबाने के बजाय उनकी छिपी प्रतिभा को पहचाना। कोई डांस में अच्छा था, कोई गायकी में, तो कोई कविता पाठ में। दीप्ति ने यूथ एवं इको क्लब के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण से जोड़ा, विद्यालय परिसर में गार्डनिंग (बागवानी) को बढ़ावा दिया और बच्चों को पेड़-पौधों के संरक्षण का पाठ पढ़ाया। विद्यालय में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि हिंदी दिवस, विश्व गौरैया दिवस और महापुरुषों की जयंतियों को त्योहार की तरह मनाया जाने लगा, जिससे बच्चे उनके महत्व को गहराई से सीख पाए। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर इन्हीं बच्चों ने मंच पर अपनी कला का ऐसा जौहर दिखाया कि सब दंग रह गए।
इस तीन साल की अनवरत तपस्या का प्रतिफल आज सबके सामने है। बच्चों के परीक्षा ग्रेड्स सुधर गए और बोर्ड परीक्षा में विद्यालय ने ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। आज कराई का यह उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय आसपास के सभी राजकीय विद्यालयों में एक 'उत्कृष्ट संस्थान' के रूप में सीना ताने खड़ा है। सफलता की गूंज ऐसी है कि स्थानीय लोग अब इसकी तुलना बड़े-बड़े प्राइवेट स्कूलों से करते हैं।
दीप्ति अंशु के चेहरे पर आज एक संतोषजनक मुस्कान है, लेकिन उनका सफर थमा नहीं है। उनकी आँखों में आज भी वही उम्मीद और चमक है कि वे अपने इस कार्य को और बेहतर बनाएँगी और कराई के बच्चों में उत्साह और जोश की लौ को हमेशा जलाए रखेंगी।